परमात्मा के द्वारा एक पहली कोशिश मानव को बदलने की

 2 साल पहले हम जैसा जीवन जी रहे थे। वो अच्छा था काफी अच्छा था। फिर एक ऐसी महामारी आई जिसने दुनिया की सूरत बदल दी, दुनिया के तौर तरीके बदल दिए,  दुनिया की तहजीब बदल दी और दुनिया के अभिवादन करने के तरीके बदल दिए।


  ये सब किसने किया आप सब लोग जानते ही होंगे और सब जानते हैं, यह सब किया, एक कोरोना वायरस ने, जिसका नाम कोविड-19 है।

 इस संसार के अंदर हर देश हर प्राणी जो ह्यूमन है, आगे बढ़ना चाहता है जैसे की घोड़ों की रेस हो रही हो उस रेस में सब को भाग लेना है और सब आगे निकलना चाहते हैं सब एक दूसरे से आगे निकलना चाहते हैं आगे निकलना चाहते हैं और तो और निकलने के जो नियम है उस नियम का पालन किए बगैर किसी को दबाकर किसी को लात मारकर किसी को उठापटक कर आगे बढ़ना चाहते हैं।

संसार में क्या हो रहा है यही तो हो रहा है हर देश एक दूसरे को नीचा दिखा रहा है हर देश एक दूसरे देश पर बहुत सारे लगाम लगा रहे हैं भाईचारा को खत्म कर रहे हैं आतंकवाद इतना उपज रहा है की मानो कि हम इस दुनिया के है ही नहीं एक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और एक उस को खत्म करने की कोशिश कर रहा है।

ऐक दूसरे देश को हथियार दे रहा है और हथियार किसके लिए दे रहा है कि वह दूसरे देश को डराए धमकाए और वह उसकी बात माने अगर ना माने तो उस पर हथियार से हमला कर दिया जाए  परमाणु बम बन रहे हैं एटम बम बन रहे हैं हाइड्रोजन बम बन गए हैं और यह हाइड्रोजन बम बहुत सारे रखे हुए हैं किसी देश के पास ज्यादा हथियार है किसी देश के पास कम हैं। और कोई इतना गरीब है कि उसके पास कुछ भी नहीं है किसी देश ने अपने देश की सुरक्षा के लिए किसी दूसरे देश के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया है द्विपक्षीय समझौता कर रखा है।

इस सब से हो क्या रहा है क्या दुनिया बच रही है क्या लोग मरने से बच रहे हैं क्या सुख शांति मिल रही है क्या जीवन सुख चैन से दिया जा रहा है क्या बीमारी खत्म हो रही है क्या लोगों के रहन-सहन में बदलाव आ रहा है क्या हम इस पृथ्वी को सुंदर बना रहे हैं क्या हम उस परमात्मा की दी हुई प्रकृति को अच्छा बना रहे हैं ।

नहीं ऐसा कुछ नहीं हो रहा है हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं हम इतने विकसित होना चाहते हैं कि पहाड़ों को काटकर हम उसके बीच से रोड बना रहे हैं हम नदियों को खत्म कर रहे हैं हम भारत आवरण को खत्म कर रहे हैं हम शुद्ध हवा को खत्म कर रहे हैं हम इस वायुमंडल में बहुत ही सुंदर अच्छी बहती हुई हवा को खत्म कर रहे हैं हम परमाणु हाइड्रोजन बम से अपने पृथ्वी के वातावरण को खत्म कर रहे हैं हम सुंदर-सुंदर वृक्षों से मिलती हुई ऑक्सीजन हम खत्म कर रहे हैं और हम वनों को खत्म कर रहे हैं हम बारिश को खत्म कर रहे हैं और तो और हम इतना प्रदूषण फैला रहे हैं कि इस  दुनिया को बचाने वाली ओजोन परत उसको भी हम खत्म कर रहे हैं तो आप यह सब करके क्या लेना चाहते हैं क्या मिलेगा


क्या आपको खुशी मिलेगी क्या आपको शांति मिलेगी क्या आपको दया मिलेगी क्या आपको पवित्रता मिलेगी क्या आपको शुद्ध वातावरण मिलेगा क्या आपके अंदर शक्ति बढ़ेगी 

जी नहीं क्योंकि हम तो केवल आत्माएं हैं और हम प्रकृति भी है क्योंकि हम प्रकृति इसीलिए हैं कि हम आत्माएं इस प्रकृति के अंदर हैं हमारा शरीर प्रकृति है हम आत्माएं उसको चलाने  वाली चालक हैं ।

Atma अजर अमर है atma कभी मरती nahi है शरीर मरता है जब आत्मा कभी न मरती है तो डर किस बात का तो हथियार किसके लिए तो भेदभाव किसके लिए तो इस प्रकृति को क्यों खिलवाड़ कर रहे हो हमें सुंदर प्रकृति बनानी है इस पृथ्वी को हमें सुंदर बनाना है गौर करे 

परमात्मा सब देख रहा है हम इंसान इंसान नहीं रहे हैं क्योंकि प्रकृति के साथ हम खिलवाड़ कर रहे हैं इसीलिए परमात्मा ने कोविड-19 वायरस छोड़ा,, एक कोविड-19 जो वायरस है यह परमात्मा का दिया हुआ है  एक वायरस ने हमें बहुत कुछ सिखा दिया हमारे तौर-तरीके सिखा दीए हमारा खुद खुद में बदलाव हुआ है 

हम बदलेंगे दुनिया बदलेगी हम सुधरेंगे युग सुधरेगा प्रकृति हमारी मां है परमात्मा हमारा पिता है हमें उनके अच्छे बच्चे बनना होगा हम बन के रहेंगे नहीं तो कल एक दिन बदलाव आएगा क्योंकि सतयुग के बाद त्रेता युग त्रेता युग के बाद द्वापर युग और द्वापर युग के बाद कलयुग कलयुग के बाद फिर सतयुग आएगा













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